हिन्दी के प्रथम कवि, महाकाव्य, रासौ ग्रंथ, डिंगल-पिंगल ?

हिन्दी साहित्य के इतिहास में हिन्दी के प्रथम कवि के रूप अलग-अलग विद्वानों ने उनके रचना और रचनाओ के समय के अनुसार हिन्दी का प्रथम कवि माना है

हिन्दी के प्रथम कवि

कहने वालेप्रथम कवि
मिश्र बंधु, शिव सिंह सेंगरपुष्पदन्त / पुष्य / पुंड
डॉ. रामकुमार वर्मास्ंवयम्भू
डॉ. नगेन्द्र, राहुल सांकृत्यायनसरहपा
गणपति चंद्र गुप्तशालीभद्र सूरी
हजारी प्रसाद द्विवेदीअब्दुर्रहमान
जयदेव सिंह, माता प्रसाद गुप्तगोरखनाथ
चंद्रधर शर्मा गुलेरीराजामुंज

अमीर खुसरो

  • ‘अमीर खुसरो’ हिन्दी साहित्य के ‘आदिकाल’ से संबंधित है
  • ‘अमीर खुसरो’ [1253-1325 ई.] का वास्तविक नाम अबुल हसन था
  • ‘अमीर खुसरो’ को खड़ी बोली हिन्दी का आदिकवि कहा जाता है
  • खुसरो ने दिल्ली के सिंहासन पर ग्यारह [11] राजाओ को देखा
  • डॉ. ईश्वरी प्रसाद ने अमीर खुसरो को महाकवि या कवियों में राजकुमार की संज्ञा दी
  • विद्वानों ने ‘अमीर खुसरो’  द्वारा रचित ग्रंथों की संख्या 100 बतायी है, इनके प्रमुख ग्रंथ निम्न है-

    (1) खलिकबारी  (2) पहेलिया  (3) मुकरिया  (4) दो सूखने  (5) गजल

हिन्दी के प्रथम कवि, महाकाव्य, रासौ ग्रंथ, डिंगल-पिंगल ?
हिन्दी के प्रथम कवि, महाकाव्य, रासौ ग्रंथ, डिंगल-पिंगल ?

हिन्दी का प्रथम महाकाव्य

‘पृथ्वीराज रासौ’ को हिन्दी का प्रथम महाकाव्य माना गया है, यह आदिकालीन रचना है और इसके रचियता ‘चंदवरदाई’ है

गौरख सिद्धांत संग्रह

‘गौरख सिद्धांत संग्रह’ के अनुसार नौ नाथ है

  1. जलंधरनाथ
  2. गोरखनाथ
  3. चर्पट नाथ
  4. जड़ भरत नाथ
  5. भीम नाथ
  6. माल्यार्जून नाथ
  7. हरिश्चंद्र
  8. सत्य नाथ
  9. नागार्जून भ्रमरगीत काव्य परम्परा, सूफी काव्याधारा, अष्टछाप के कवि और बीजक
पंच मकार कौनसे है
  1. माँस
  2. मदिरा
  3. मैथुन
  4. मुद्रा
  5. मत्स्य भक्तिकाल के प्रमुख सम्प्रदाय, प्रवर्तक, दर्शन, गुरु और शिष्य

रासौ ग्रंथ

रासौ ग्रंथरचियता
पृथ्वीराज रासौचंदवरदाई
बीसलदेव रासौनरपति नाल्ह
परमाल रासौजगनिक
खुमाण रासौदलपति विजय
हम्मीर रासौसारंगधर
विजयपाल रासौनल्ह सिंह भाट
हिन्दी साहित्य इतिहास संबंधी प्रमुख ग्रंथ और काल नामकरण

डिंगल और पिंगल क्या है

डिंगलपिंगल
अपभ्रंश मिश्रित राजस्थानी  अपभ्रंश मिश्रित ब्रज
वीर रसश्रंगार रस   
ओज गुणमाधुर्य गुण
गौड़ी रीतिवेदर्भी रीति
रीतिकाल के प्रमुख कवि और रचनाएं

हिन्दी का प्रथम महाकाव्य

‘पृथ्वीराज रासौ’ को हिन्दी का प्रथम महाकाव्य माना गया है, यह आदिकालीन रचना है और इसके रचियता ‘चंदवरदाई’ है

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